श्री जागेश्वर नाथ कात्यायनी धाम पुराना शिवालय, रिठाला

रिठाला गाँव की पहचान और आस्था का प्रतीक है श्री जागेश्वर नाथ कात्यायनी धाम पुराना शिवालय। इस पवित्र मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है और आज भी गाँव की संस्कृति और भक्ति का केन्द्र बना हुआ है।
माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण दिल्ली वाली पंडतानी जी ने करवाया था। उन्होंने लगभग 3 बीघा 12 बिस्वा (3600 वर्ग गज) भूमि मंदिर के लिए दी थी। उस समय यह भूमि पूरी तरह मंदिर परिसर के लिए सुरक्षित थी, लेकिन समय के साथ-साथ धीरे-धीरे इस पर लोगों ने कब्ज़ा करना शुरू कर दिया। आज उस विशाल भूमि का केवल एक छोटा सा भाग ही मंदिर के पास बचा है।
मंदिर सिर्फ़ पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की जीवित पहचान है।”
इस बचे हुए हिस्से को बचाने का श्रेय स्वामीजी को जाता है। अगर उन्होंने समय रहते हस्तक्षेप न किया होता तो बाकी जमीन भी आस-पड़ोस में बने मकानों के कब्ज़े में चली जाती। वास्तव में यह मंदिर केवल आस्था का केन्द्र नहीं बल्कि एक संघर्ष की कहानी भी है, जिसने मंदिर की धरोहर को सुरक्षित रखा।

इससे पहले यहाँ एक छोटा सा मंदिर मौजूद था जो कांसर जोहड़ (रिठाला का तालाब) के पास, एस.आर. एन्क्लेव के पूर्वी द्वार पर स्थित था। गाँव के लोग वहीं भगवान शिव की पूजा करते थे। लेकिन समय बीतने के साथ मंदिर की महत्ता और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई।
आज यह मंदिर एक नए रूप में सामने आया है। मलेशिया की एक महिला द्वारा संचालित चैरिटेबल ट्रस्ट ने मंदिर का पुनर्निर्माण और विस्तार कराया है। पुराने शिवालय को भव्य स्वरूप दिया गया है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस धरोहर को देख सकें और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
रिठाला गाँव के लोग इस मंदिर को न सिर्फ़ धार्मिक स्थल मानते हैं, बल्कि इसे अपनी पहचान और संस्कृति से भी जोड़ते हैं। हर त्यौहार और शिवरात्रि पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, जहाँ भक्त बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।
यह मंदिर हमें यह सिखाता है कि चाहे समय कितना भी बदल जाए, आस्था और परंपराएँ हमेशा जीवित रहती हैं। श्री जागेश्वर नाथ कात्यायनी धाम पुराना शिवालय, रिठाला वास्तव में गाँव की धड़कन है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा भी।
जो शिव को मानता है, वो समाज में भाईचारे और प्रेम को भी अपनाता है।





